सोननदी जोगदहा घाट में बह रही और जिंदगी और मौत से लड़ रही किशोरी को चार देवदूतों ने बचाई जान, अमिलिया पुलिस ने चारों युवक को दिया पुरस्कार..

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सीधी बड़ी :- खबर अमिलिया बहरी से
कहते हैं जाको रखे साईंया मार सके न कोय। इस कहावत को चरितार्थ करते हुए यह दृष्य प्रतीत करता है।

जानकारी के अनुसार बिट्टन कोल पिता दीना कोल निवासी ग्राम सुड़वार थाना अमिलिया उम्र 15 वर्ष जो कि अपने रिश्तेदारी कुबरा गांव से ऑटो में बैठकर अमिलिया आ रही थी उसी समय अचानक सोननदी पुल पर चक्कर आने लगा और ऑटो चालक से बताया तो ऑटो चालक ने बड़ी गलती करते हुए पुल पर ही उतार दिया और उतरते ही उसे चक्कर आ गया और सीधे पुल से नदी में जा गिरी
वही राहगिरोके द्वारा देखा गया कि लड़की नदी में बह रही है।शोरगुल करने पर वही पास में खेल रहे 4लड़के अभिषेक केवट ,विक्रम साहू बघोर ,विकास केवट अतरैला सन्तोष केवट अतरैला द्वारा अपने जीवन की परवाह न करते हुए नदी में छलांग लगाई और डूबती हुई नाबालिग लड़की को नदी के बीच से निकाल बाहर निकाल लाया गया ।राहगीरों में से सेमरी निवासी विवेकानन्द तिवारी द्वारा सीधी पुलिस अधीक्षक आर एस बेलवंशी एवम पोल खोल पोस्ट ब्यूरो राजू गुप्ता को फोन से सूचना दी गई।पुलिस अधीक्षक द्वारा प्वाइंट चलाया गया तथा थाना अमिलिया और बहरी पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और अपने स्टाफ के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई

युवती की जान बचाने वाले चारों लड़कों को अमिलिया थाना प्रभारी दीपक सिंह बघेल द्वारा 1000 -1000 रुपये के नकद पुरस्कार दिया गया।
वही हैरान करने वाली बात यह रही कि जब थाना प्रभारी द्वारा घायल नाबालिग लड़की के उपचार के लिए अमिलिया अस्पताल लाया गया तो वहाँ पदस्थ नर्स आसना विश्वकर्मा द्वारा ईलाज करने से इनकार कर दिया गया जिस पर थाना प्रभारी द्वारा सिहावल भेजा गया।क्या अस्पताल केवल शो पीस बन कर रह गए है…?

उस ऑटो चालक पर क्या कार्यवाही नहीं होनी चाहिए जो कि पुल पर ही उतार कर वहां से भाग गया उसे पुलिस को सूचना देना चाहिए था और उसकी हरसम्भव मदद करनी चाहिए थी लेकिन मानवता के धर्म को भूल कर उसे नदी में गिरने के लिए छोड़कर भाग गया जब उसे चक्कर आ रहा था ऐसे चालकों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए..?
खुशी की बात है कि लड़की स्वस्थ है और अपने घर कुशलतापूर्वक अमिलिया पुलिस द्वारा पहुंचाया गया।