पेट्रोलियम की महंगाई, नेताजी की छनती मलाई, लोगों को खाए जात डायन महागाई- उमेश तिवारी।

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सीधी| टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कहा है कि कोरोना के चलते बड़ी आबादी के रोजगार धंधे चौपट हो गए हैं लोगों के हाथों से रोजगार छिन चुके हैं उनकी माली हालत खराब है उस पर पेट्रोल डीजल रसोई गैस की बेतहाशा बढ़ती कीमतें असहनीय हो गई हैं। डीजल – पेट्रोल की लगातार मूल्य वृद्धि से जहां वाहनों का किराया भाड़ा और वस्तुओं की परिवहन लागत बढ़ती जा रही है वहीं रसोई गैस गरीबों की पहुंच से दूर होती जा रही है। उमेश तिवारी ने कहा कि 2004 से 2021 का समय काल देखें तो पेट्रोलियम की कीमतें बढ़ी नहीं बल्कि उछाल लगाई है।

 

 

2004 में पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 36 रुपये 81 पैसे थी, 2014 में 71 रुपये थी, 2021 में 111रुपये 33 पैसे है। डीजल 2004 में प्रति लीटर 24 रुपये 16 पैसे, 2014 में 57 रुपए, 2021 में 99 रुपये 75 पैसे प्रति लीटर है। रसोई गैस 2004 में 261 रुपये 50 पैसे, 2014 में 414 रुपये, 2021 में 861 रुपये प्रति सिलेंडर है। गौर करने वाली बात है कि आजादी के समय 1947 में पेट्रोल की कीमत 27 पैसे प्रति लीटर थी।

ऐसे बढ़ जाता है पेट्रोल डीजल का दाम
उमेश तिवारी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इनका दाम दोगुना हो जाता है। उदाहरण के तौर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें तो 16 जून के उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल का मूल्य 96.66 रुपये प्रति लीटर था। इसमें इंडियन ऑयल की रिफाइनरी से निकलने वाले पेट्रोल की कीमत 37.29 रुपये थी। औसतन 36 पैसे की परिवहन लागत के साथ पेट्रोल पंप मालिकों को पेट्रोल 37.65 रुपये प्रति लीटर मिला। डीलर को प्रति लीटर 3.80 रुपये का कमीशन मिला। इस पर केंद्र सरकार का 37.65 रुपये का उत्पाद शुल्क और राज्य सरकार का 22.31 रुपये का वैट जुड़ने के बाद कीमत 96.66 रुपये प्रति लीटर हो गई। इसी प्रकार 16 जून को 87.41 रुपये में बिकने वाला डीजल डीलर को 40.23 रुपये का मिला। डीलर का कमीशन 2.59 रुपये बना। डीजल पर केंद्र सरकार 31.80 रुपये का उत्पाद शुल्क लेती है

 

 

 

जबकि दिल्ली सरकार 12.79 रुपये वैट लेती है। देश में लगभग हर महीने पेट्रोल की खपत 24 लाख टन, डीजल की खपत 62 लाख टन और रसोई गैस की खपत लगभग 23 लाख टन हो रही है। इस तरह प्रति लीटर से की जा रही कमाई के हिसाब में पेट्रोलियम से केंद्र एवं राज्य की सरकारों को अरबों खरबों की कमाई हो रही है। पेट्रोलियम सरकार के लिए दुधारू गाय बना है जिससे नेताओं की मलाई छन रही है। उमेश तिवारी ने कहा कि जहां पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों से पेट्रोल, डीजल, कपड़ा, सब्ज़ियां, दूध, फल, अनाज, मांस, बिजली, टीवी, फ्रीज, सोना -चांदी, किताब, कॉपी, साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट जैसे चीज़ो की कीमतें आसमान छू रही है, जिससे आम आदमी हैरान और हलकान है। वहीं देश के प्रधान कम परिधानमंत्री मोदी जी के प्रचार प्रसार में पिछले 6 साल में हर दिन 3 करोड़ 23 लाख रुपए खर्च किये गए है तथा उनकी विदेश यात्रा में 5 साल में 465 करोड़ रुपये खर्च किए यानी विदेश यात्रा में 25 लाख 44 हजार 427 रुपए हर रोज खर्च किये गए है।