पीएम आवास की किस्त अटकने से अब घर का सपना हुआ अधूरा

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नई दिल्ली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना मप्र के श्योपुर जिले के शहरी क्षेत्र में फ़ैल नजर आ रही है यहां के बेघर परिवारों का अपने घर का सपना सरकारी फाइलों में उलझकर रह गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना लॉन्च होने के साथ ही श्योपुर में नगर पालिका को 5000 मकान बनाने का लक्ष्य दिया गया लेकिन 7 सूचियों में केवल 3232 आवास को मंजूरी मिली है। इनमें भी सिर्फ 900 हितग्राहियों के आवास बनने शुरू हुए हैं। जबकि 2332 हितग्राहियों को आवास मंजूर होने के 15 महीने से खाते में पहली किस्त आने का इंतजार है। पीएम आवास की लिस्ट में नाम आने के बाद सैकडों हितग्राही किस्त के लिए नगरपालिका दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। शहर के वार्ड 17 से शनिवार को नगरपालिका पहुंचे आदिवासियों ने अपना दुखड़ा सुनाया। इन लोगों का दर्द है कि दो साल पहले लिस्ट में नाम आने पर पक्का मकान बनने का सपना दिखाकर नपा अधिकारियों ने उनके कच्चे छप्परपोश घर गिरवा दिए थे। लेकिन उन्हें आज तक एक भी किस्त नहीं मिली है। जबकि उनके बाद आवेदन करने वाले वार्ड 17 के संपन्न परिवारों को किस्त मिलने के साथ ही आवास बनने का काम भी शुरू हो गया। वहीं इससे पहले शुक्रवार को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने वार्ड 16 और 17 के ऐसे हितग्राहियों की सूची नपा सीएमओ को सौंपी जिनके नाम अगस्त 2019 को जारी हुई लिस्ट में जुड़ने के साथ ही सत्यापन होने के बावजूद किस्त नहीं मिली है। किस्त मिलने में हो रही देरी को लेकर आक्रोशित लोगों ने आवास के एवज में पैसे मांगने की भी शिकायतें की है। प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी का मामला राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल सिंह मीणा ने शहरी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में धांधली का मुद्दा विधानसभा में उठाने की बात कही है। वहीं इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल का कहना है कि आवास के लिए शासन से पैसा नहीं मिलने के कारण समस्या आ रही है। योजना के तहत पहली तीन डीपीआर में शामिल हितग्राहियों को ही मिली आवास की किस्त प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्र से 5 हजार से अधिक लोगों ने आवेदन फार्म भरे हैं।

 

नगर पालिका द्वारा योजना के तहत 7 सूचियों में 3232 आवास की डीपीआर मंजूर की गई है। इनमें पहली डीपीआर में 334, 191 और 375 वाली लिस्ट में जुड़े कुल 900 हितग्राहियों को ही किस्त दी गई है। जबकि 252, 506, 626 और 948 आवास की सूची में जिन 2332 हितग्राहियों को शामिल किया गया है उनमें एक भी हितग्राही को आज तक एक पैसा भी नहीं मिल सका है। नगर पालिका में विधायक प्रतिनिधि सिराज दाऊदी का कहना है कि शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना में नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के साथ पटवारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। मैंने पिछले छह महीने से हितग्राहियों के घर-घर जाकर पड़ताल की है। इसमें पता चला है कि पटवारियों ने पैसे नहीं देने पर कच्चे छप्परपोश घर को पक्का बता दिया। पटवारी की सत्यापन रिपोर्ट पर आवेदन निरस्त कर दिए गए। वार्ड 16 में ऐसे केस भी सामने आए हैं, जहां कच्चे घर को पक्का मकान बताकर निरस्त कर दिए जाने के बाद दोबारा जांच में पात्र मिले हितग्राहियों के आवास मंजूर किए गए। नपा में विधायक प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर श्योपुर में पीएम आवास की जांच लोकायुक्त टीम से करवाने की मांग की है।