दक्षिण एशियाई देशों के संगठन ने मानी भारत की मांग

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दक्षिण एशियाई देशों के संगठन ने द्विपक्षीय मुक्त व्यापार संधि की समीक्षा करने की लंबे समय से चली आ रही भारत की मांग मान ली है। इसके बाद भारत की यह चिंता दूर हो सकेगी कि भारत को इस संधि से लाभ नहीं हो रहा है और 10 सदस्यों वाले एसोसिएशन के साथ उसका व्यापार घाटा बढ़ गया है। आसियान के सदस्य देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा वित्तवर्ष 2018 के 12 अरब डॉलर से बढ़कर वित्तवर्ष 2019 में 22 अरब डॉलर हो गया था। संयुक्त बयान के मुताबिक दोनों पक्ष एफटीए को ज्यादा यूजर फ्रेंडली, आसान और कारोबार को बढ़ावा देने वाली संधि बनाने को राजी हुए। मंगलवार को बैंकाक में 16वें आसियान इकनॉमिक मिनिस्टर्स -इंडिया मीटिंग में आसियान के सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच करार हुआ। वस्तुओं के मामले में 2010 में लागू होने के बाद एफटीए की पहली समीक्षा अब होगी। एफटीए में इंडिया के ज्यादा इंटरेस्ट वाले सर्विसेज कंपोनेंट पर डील पिछले साल साइन हुई थी और इसके इनवेस्टमेंट चैप्टर का अनुमोदन अभी नहीं हो पाया है। दोनों पक्षों ने समीक्षा के लिए संयुक्त समिति का गठन करने का भी फैसला किया। गोयल ने अधिकारियों को समीक्षा के ब्यौरे पर काम करने और अगली मिनिस्ट्रियल मीटिंग में इस पर अपडेट देने का जिम्मा दिया है।
भारत सरकार का मानना है कि एफटीए से उसके मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर नेगेटिव असर हुआ है जबकि वह रोजगार सृजन के लिए मेक इन इंडिया अभियान के जरिए इस बढ़ावा देने में जुटी है। वित्तमंत्रालय ने देश की अर्थव्यवस्था पर इन करारों के असर का जायजा लेने के लिए इसके एफटीए फ्रेमवर्क की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत सरकार ने आसियान की तिकड़ी के वाणिज्य मंत्रियों से कहा था कि आसियान के सदस्य देशों की तरफ से सर्विसेज के मामले में समुचित ऑफर करने के वादे पर अमल नहीं हुआ है।