चार जवानों की हत्या के मामले में यासीन मलिक के खिलाफ सुनवाई 1 अक्टूबर से 25 जनवरी 1990 का मामला

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जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) लीडर यासीन मलिक के खिलाफ एयरफोर्स के चार जवानों की हत्या के मामले में अब 1 अक्टूबर को सुनवाई होगी। जम्मू टाडा कोर्ट ने मलिक के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी करते हुए पुलिस को उन्हें 11 सितंबर तक कोर्ट के सामने पेश करने को कहा था।
क्या है पूरा मामला: 25 जनवरी, 1990 को स्क्वैड्रन लीडर रवि खन्ना और उनके तीन साथियों की श्रीनगर के बाहरी इलाके में हत्या कर दी गई थी। इस दुर्दांत घटना के लिए यासीन मलिक के नेतृत्व वाले आतंकियों को जिम्मेदार बताया जाता है। मलिक पर वायुसेना के जवानों पर घातक हमले की साजिश रचने का आरोप है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बाद में पुलिस को बताया था कि खन्ना ने कार में आए आतंकवादियों के हमले से अपने साथियों को बचाने की कोशिश की। इस दौरान वह आतंकियों के बेहद खतरनाक स्वचालित हथियारों का निशाना बन गए। 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण में भी मलिक का ही हाथ बताया जाता है।
1995 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने श्रीनगर में टाडाकोर्ट नहीं होने का हवाला देकर मलिक के खिलाफ केस की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 2008 में मलिक ने यह कहकर विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया कि उनके खिलाफ मुकदमे की सुनवाई श्रीनगर में होनी चाहिए क्योंकि अमरनाथ यात्रा पर मचे बवाल के कारण उनकी सुरक्षा को खतरा है। दरअसल, हर साल आयोजित होने वाली अमरनाथ यात्रा के दौरान बाहरियों को लीज पर जमीन देने के मुद्दे पर जम्मू और कश्मीर के लोगों के विचार धार्मिक आधार पर बंट गए थे। इस वर्ष 26 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 2008 में दो मुकदमों की सुनवाई श्रीनगर ट्रांसफर करने के सिंगलबेंच के आदेश को रद्द कर दिया। जेकेएलएफ चीफ यासीन मलिक अभी दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं। एनआईए ने उन्हें आतंकवादियों और अलगाववादी संगठनों की फंडिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था।