महाराष्ट्र में हलचल

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राष्ट्रीय राजनीति में जारी हलचल का असर राज्यों में दिखना स्वाभाविक है। चुनावी सीजन पास हो तो नेताओं की निष्ठा और नैतिकता भी डोलने लगती है। कुछ ऐसा ही इन दिनों महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा। राज्य में इसी साल चुनाव होने हैं और अगले माह तक संभव है कि आचार संहिता भी लागू हो जाए। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और एनसीपी ने गठबंधन कर भाजपा शिवसेना गठबंधन से ज्यादा सीटे जीतने की रणनीति जरूर बनाई थी। मगर सफल नहीं हो पाए। चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस और एनसीपी में मची भगदड़ जारी है। कांग्रेस का दामन छोडऩे में नेता आगे है। हालांकि एनसीपी में भी दरार बढ़ती जा रही है। एनसीपी के नेता शेखर गोरे ने गुरुवार को शिवसेना का दामन थाम लिया। शिव सेना के नेता नितिन बांगुड़े के साथ गोरे गुरुवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के निवास मातोश्री पहुंचे और यहां पार्टी की सदस्यता संबंधी कार्रवाई पूरी की। इससे पहले एनसीपी के तीन विधायकों ने बीजेपी की सदस्यता ले ली थी। वहीं कांग्रेस लेजिस्लेटर कालीदास कोलांबकर ने भी कुछ ही दिनों पहले बीजेपी की सदस्यता ले ली थी। कांग्रेस और एनसीपी से नेताओं की अब रवानगी दोनों पार्टियों के लिए शुभ संकेत नहीं है। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव अक्टूबर माह में होने हैं। इस चुनाव के लिए भाजपा और शिवसेना ने जहां रणनीति बनाकर उसपर अमल करने की कवायद शुरू कर दी है वहीं कांग्रेस और एनसीपी अपने नेताओं को बाहर जाने से नहीं रोक पा रहे हंै। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में आए नतीजों से यह तो साफ हो गया था कि राज्य का चुनाव कांग्रेस एनसीपी के लिए आसान नहीं होने वाला है। अगर दोनों पार्टियां अपने नेताओं को बागी तेवर अपनाने से नहीं रोक पाई तो भाजपा और शिवसेना की सत्ता तक पहुंच आसान हो जाएगी।

370 का प्रचार करेगी भाजपा
कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले को देशभर में प्रचारित करने की मुहिम भाजपा ने छेड़ दी है। इस फैसले का राजनीतिक लाभ लेने और जनता में खुद की विश्वसनीयता और बढ़ाने के लिए पार्टी ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। भाजपा ने सभी प्रदेश और जिला मुख्यालयों पर प्रेस कांफ्रेस करने और सरकार की उपलब्धि को जन जन तक पहुंचाने के आदेश जारी किए हैं। इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सरकार के दूसरे मंत्रियों की तारीफ में कसीदे पढ़े जाएंगे। इसके साथ ही सभी बीजेपी शासित राज्यों की विधानसभाओं में अभिनंदन प्रस्ताव पारित करने को कहा गया है, इसमें पीएम, गृह मंत्री और केंद्र सरकार का अभिनंदन किया जाएगा। इसके अलावा सभी मंडलों में 3-4 दिनों के भीतर उत्साह के कार्यक्रम करने के लिए भी निर्देश है। साथ ही, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्प को पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार ने कैसे साकार किया, इस पर भी व्यापक चर्चा कराने का निर्देश दिया गया है। इन कार्यक्रमों व उत्सवों में आम लोगों को भी जोडऩे को कहा गया है। भाजपा की श्रेय लेने की कोशिश पहली बार नहीं दिख रही है। 2014 से अब तक भाजपा की सरकार ने जो भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है उसे जोरदार ढंग से प्रचारित किया गया है। नोटबंदी हो, जीएसटी हो, सर्जिकल स्ट्राइक हो, या फिर एयर स्ट्राइक हर बार भाजपा ने ऐसा माहौल तैयार किया जिसने उसकी राजनीतिक जमीन को खूब खाद दी। अब तीन तलाक बिल और धारा 370 हटाने के बाद भाजपा की मंशा उछाले मार रही है। पार्टी को लगता है कि इस मुद्दे को बेहतर ढंग से जनता के बीच रख दिया गया तो न सिर्फ इसी साल राज्यों में होने वाले चुनाव में मदद मिलेगी बल्कि अन्य सभी राज्यों में होने वाले चुनाव में ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं रह जाएगी।

आजम खान की मुसीबतें
यूपी के रामपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद आजम खान पर आफत आनी खत्म नहीं हुई है। उनकी मुश्किलें और बढ़ती दिखाई दे रही हैं, पहले किसानों की ओर से लगातार दर्ज हो रहे मामलों के बाद अब रामपुर शहर कोतवाली में आजम सहित चार लोगों पर शत्रु संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। नायब तहसीलदार की तरफ से दर्ज किए गए इस मामले में आरोप लगाया गया है कि जौहर विश्वविद्यालय ट्रस्ट और आजम खान को फायदा पहुंचाने के लिए ईओ ने कागजों में हेराफेरी कर गलत नोटिस जारी किया। बताया गया है कि रामपुर के सींगनखेड़ा में शत्रु संपत्ति को पहले वक्फ में अंकित करवा लिया गया और उसके बाद कब्जे का नोटिस जारी कर दिया गया। इसके बाद आजम खान ने इसे अपने ट्रस्ट में शामिल कर लिया। आजम खान की यह मुश्किलें उनके द्वारा किए गए गैर कानूनी कामों की वजह से है या किसी और वजह से यह सभी जानते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान ने भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा पर अशोभनीय टिप्पणी की थी वह न सिर्फ जयाप्रदा बल्कि पूरी भाजपा नागवार गुजरा था। रही सही कसर आजम ने संसद के बजट सत्र के दौरान पूरी कर दी। जब उन्होंने भाजपा सांसद रमादेवी के खिलाफ शायरी करते हुए आपत्तिजनक शब्द कह दिए थे। दबाव में आजम ने भले ही माफी मांग ली हो मगर भाजपा उनका हिसाब करने पर आ गई है। यह तय है कि आने वाले दिनों में आजम के खिलाफ कई और मामले खुलेंगे।

ममता का नया रुप किसके लिए
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को वीआईपी रोड स्थित तेघरिया क्रॉसिंग पर अचानक अपना काफिला रुकवा दिया। इसके बाद सीएम ममता अपनी कार से उतरीं और वहां तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को जमकर फटकार लगाई। दरअसल, पुलिसकर्मियों ने ममता बनर्जी का काफिला सुगमता से निकलवाने के लिए ट्रैफिक रोक दिया था। ममता ने अपने काफिले को एक किनारे खड़ा कराया और अधिकारियों से कहा कि वे ट्रैफिक को गुजरने दें। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पर तकरीबन साढ़े चार मिनट तक खड़ी रहीं जब तक कि आम यातायात शुरू नहीं करा दिया गया। ममता ने पुलिसकर्मियों को इस बात का संदेश दिया कि आम जनता के लिए वीआईपी पासिंग को भले रोक दिया जाए लेकिन पब्लिक को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ममता की यह छवि बंगाल में पहली बार दिखी है। इससे पहले वे लाव लश्कर के साथ सड़कों पर प्रदर्शन करते और ट्रैफिक बाधित करते दिख चुकी हैं। लोकसभा चुनाव में एड़ी चोटी का जोर लगाने के बाद भी ममता न तो भाजपा को केंद्र में सरकार बनाने से रोक पाईं और न ही बंगाल में भाजपा की बढ़ती ताकत को रोक पाईं। ममता अब यह समझ गई हैं कि अगर भाजपा को परास्त करना है और खुद का प्रभाव बढ़ाना है तो भाजपा की लोगों से जुड़ाव की नीति को ही अपनाना होगा। लोकसभा चुनाव के दौरान ममता ने अपने ही राज्य के लोगों से बैर ले लिया था, यह भी उनके खिलाफ गया था। ममता को जनता से दूरी बनाने का नुकसान अब समझ में आने लगा है। इसीलिए ममता अब जनप्रिय नेता बनने के तरीके ढूंढने लगी हैं। सड़क पर ट्रैफिक दुरुस्त कराने अपना काफिल रोकने और काफी देर तक सड़क पर खड़े रहकर ममता ने जनप्रिय बनने की शुुरुआत कर दी है। अब दे ाना यह है कि बंगाल की जनता ममता की इस छवि को पास करती है या फेल।